जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने ग्रीनलैंड को लेकर चल रहे विवाद के बीच शांति और कूटनीतिक समाधान की अपील की है। उन्होंने कहा है कि मौजूदा स्थिति गंभीर सैन्य टकराव में नहीं बदलनी चाहिए और यूरोप सक्रिय रूप से सुरक्षा संबंधी चिंताओं को संभालने में सक्षम है।
पिस्टोरियस ने यह भी स्पष्ट किया कि वे इस मामले को “पावर प्ले (influence के लिए रणनीतिक दांव-पेंच)” के रूप में देखते हैं न कि वास्तविक क्षेत्रीय संघर्ष के रूप में। उनका मानना है कि नाटो के भीतर सहयोग बढ़ाकर आर्कटिक और उत्तरी अटलांटिक की सुरक्षा को मजबूत किया जा सकता है, जिससे संयुक्त सुरक्षा चिंताओं का समाधान शांतिपूर्ण रूप से किया जा सकता है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि यूरोपीय देशों को सुरक्षा को सुनिश्चित करने में एकजुट रहना चाहिए और नाटो की भूमिका महत्वपूर्ण है, ताकि कोई भी विवाद ईंट-बाजी या युद्ध की ओर न बढ़े। पिस्टोरियस का बयान क्षेत्रीय स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के महत्व को रेखांकित करता है, साथ ही यह भरोसा जताता है कि यूरोपीय सहयोग के माध्यम से मौजूदा मतभेदों को समायोजित और शांतिपूर्वक समाधान किया जा सकता है।
इस बीच यूरोपीय नाटो सदस्य देशों ने ग्रीनलैंड में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ाने का निर्णय लिया है ताकि क्षेत्र में बढ़ते रूस और चीन के प्रभाव को संतुलित किया जा सके, लेकिन पिस्टोरियस इस बात पर जोर दे रहे हैं कि यह कदम संघर्ष को बढ़ाने की बजाय सुरक्षा को सुनिश्चित करने वाला होना चाहिए।
संक्षेप:
पिस्टोरियस ने विवाद को सैन्य टकराव बनने से रोकने की अपील की।
उन्होंने यह कहा कि मामला “सत्ता-खेल” जैसा है, जिसे नाटो सहयोग से शांतिपूर्ण ढंग से संभाला जा सकता है।
यह बयान क्षेत्रीय स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के महत्व को दर्शाता है।
