लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की चार बार मुख्यमंत्री रहीं मायावती ने कहा है कि आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा आमचुनाव को ध्यान में रखते हुए पार्टी संगठन को जमीनी स्तर तक और अधिक मजबूत किया जा रहा है। इसी क्रम में प्रदेश संगठन में आवश्यक और व्यापक फेरबदल किए गए हैं, ताकि पूरी निष्ठा और मिशनरी भावना से काम करने वाले कार्यकर्ताओं को आगे लाकर उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी जा सकें।दिनांक 07 फरवरी 2026 को लखनऊ में आयोजित बीएसपी उत्तर प्रदेश स्टेट यूनिट की विशेष बैठक में प्रदेश, मंडल, जिला और विधानसभा स्तर तक के सभी छोटे-बड़े पदाधिकारियों की मौजूदगी में मायावती ने चुनावी रणनीति और संगठनात्मक मजबूती को लेकर गहन विचार-विमर्श किया। उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यकर्ता विरोधी दलों के साम, दाम, दंड, भेद जैसे हथकंडों और कुछ स्वार्थी तत्वों के षड्यंत्रों का डटकर मुकाबला करते हुए संगठन को मजबूत बनाने में जुटे हैं, लेकिन विधानसभा चुनाव की दृष्टि से संगठनात्मक बदलाव जरूरी थे।
मायावती ने कहा कि बीएसपी का लक्ष्य मिशन-2027 को मिशन-2007 की तरह साकार करना है, ताकि उत्तर प्रदेश में फिर से पूर्ण बहुमत की सरकार बनाकर ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ के सिद्धांत को व्यवहार में उतारा जा सके। उन्होंने कहा कि बीएसपी सरकार के दौरान कानून द्वारा कानून का राज स्थापित हुआ था, जिससे समाज के हर वर्ग को सुरक्षा, सम्मान और न्याय मिला। पार्टी की सरकार जाने के बाद प्रदेश में आमजन के अनुसार कानून-व्यवस्था, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा की स्थिति लगातार कमजोर हुई है, इसलिए जनता फिर से बीएसपी सरकार की प्रतीक्षा कर रही है।उन्होंने वर्तमान भाजपा सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि कुछ गिने-चुने स्वार्थी लोगों को छोड़ दिया जाए तो समाज का लगभग हर वर्ग आज खुद को दुखी और त्रस्त महसूस कर रहा है। विशेष रूप से ब्राह्मण समाज अपनी उपेक्षा, असुरक्षा और असम्मान को लेकर खुलकर आवाज उठा रहा है, जिसकी चर्चा देशभर में हो रही है।
मायावती ने कहा कि बीएसपी सरकार और संगठन ने सर्वसमाज के साथ-साथ ब्राह्मण समाज को भी पूरा सम्मान, पद और सुरक्षा दी है और यह सवाल जनता खुद पूछ रही है कि क्या किसी अन्य दल या सरकार ने ऐसा किया है।उन्होंने दोहराया कि बीएसपी की नीति हमेशा सर्वसमाज के हित की रही है। कानून का सख्त और निष्पक्ष पालन कर सभी धर्मों और वर्गों के लोगों के जान-माल और मजहब की सुरक्षा सुनिश्चित की गई थी, जिससे उत्तर प्रदेश के विकास का मार्ग प्रशस्त हुआ। इसके विपरीत विरोधी दलों की राजनीति संकीर्ण, जातिवादी, सांप्रदायिक और पूंजी समर्थक रही है, जिसका खामायावती ने एससी, एसटी और ओबीसी आरक्षण से जुड़े मुद्दों का जिक्र करते हुए कहा कि आरक्षण-विरोधी सोच और नीतियों के कारण इन वर्गों को सरकारी नौकरियों और पदोन्नति में गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि हाल के यूजीसी नियमों ने सामाजिक समरसता को बढ़ाने के बजाय नया सामाजिक तनाव पैदा किया है, जो चिंताजनक है। बीएसपी बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर के संविधान और मानवतावादी सोच के अनुरूप सर्वसमाज के हित को ही देश और जनहित का आधार मानती है।उन्होंने यह भी कहा कि स्थायी रोजगार की जगह ठेका और आउटसोर्स व्यवस्था ने बड़े पैमाने पर शोषण को जन्म दिया है, जिससे शिक्षा, स्कूल और अस्पताल जैसी बुनियादी सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।
उत्तर प्रदेश के वास्तविक विकास के लिए अच्छी सड़कें, बिजली, पानी, ट्रैफिक व्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं और रोजगार के अवसर जरूरी हैं, जिन पर सरकार को बिना किसी भेदभाव के गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के संबंध में मायावती ने कहा कि यदि सरकार को चिंता है तो इसका समाधान यही है कि अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए जाएं, ताकि आमजन को वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने में पूरा और सहानुभूतिपूर्ण सहयोग मिले। उन्होंने विशेष रूप से गरीब, मजदूर, महिलाएं, दैनिक वेतनभोगी और अशिक्षित वर्ग के लोगों को मतदान के अधिकार से वंचित न होने देने पर जोर दिया।संसद के मौजूदा बजट सत्र पर टिप्पणी करते हुए मायावती ने कहा कि सरकार और विपक्ष के बीच टकराव के कारण सत्र बार-बार बाधित हो रहा है, जिससे देश और जनहित से जुड़े अहम मुद्दों पर सार्थक चर्चा नहीं हो पा रही है। उन्होंने कहा कि सवाल-जवाब और तथ्यपरक बहस के जरिए जनता को सच जानने का अवसर मिलना चाहिए, ताकि वह खुद सही और गलत का आकलन कर सके।बैठक से पूर्व मीडिया को संबोधित करते हुए मायावती ने कहा कि विधानसभा चुनाव में अब अधिक समय शेष नहीं है, इसलिए पार्टी संगठन को दिशा-निर्देश देने और जमीनी तैयारियों को गति देने के लिए यह प्रदेश स्तरीय महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है। इसमें प्रदेश, मंडल, जिला और सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों के पदाधिकारी और प्रभारी शामिल हुए हैं।
उन्होंने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया के कारण पार्टी के कई कार्य प्रभावित हुए हैं, जिन्हें जल्द पूरा करने के लिए विशेष कदम उठाए जाएंगे।अंत में मायावती ने कहा कि विरोधी दल जाति और धर्म के नाम पर राजनीति कर समाज में द्वेष और नफरत फैलाने का काम कर रहे हैं, जो देश और जनहित के लिए ठीक नहीं है। सत्ता और विपक्ष दोनों को संविधान की गरिमा और संसदीय मर्यादाओं का पालन करना चाहिए। इन्हीं बातों के साथ उन्होंने प्रदेश स्तरीय बैठक की औपचारिक शुरुआत की।
