लखनऊ। उत्तर प्रदेश के जलशक्ति मंत्री श्री स्वतंत्र देव सिंह की अध्यक्षता में सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के मुख्यालय स्थित सभागार में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रमुख सचिव सिंचाई एवं जल संसाधन, प्रमुख अभियंता एवं विभागाध्यक्ष सहित विभिन्न संगठनों के मुख्य अभियंता (सिविल/यांत्रिक) स्तर के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।बैठक के दौरान जलशक्ति मंत्री ने विभाग की विभिन्न निर्माणाधीन परियोजनाओं की गहन समीक्षा की। धीमी प्रगति वाली परियोजनाओं पर गहरी नाराज़गी व्यक्त करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्य संस्कृति में किसी भी स्तर पर शिथिलता, लापरवाही या उदासीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक परियोजना की अनिवार्य रूप से मासिक मॉनिटरिंग की जाए, बाधाओं की पहचान कर उन्हें तत्काल दूर किया जाए तथा कार्यों की गुणवत्ता, समय-सीमा और पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। गुणवत्ता अथवा समय-सीमा में चूक पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों एवं कार्यदायी संस्थाओं के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।
श्री स्वतंत्र देव सिंह ने निर्देश दिए कि विभाग की सभी निर्माणाधीन परियोजनाओं को दिसंबर 2026 तक अनिवार्य रूप से पूर्ण कराया जाए, जिससे योजनाओं का वास्तविक लाभ किसानों एवं आम नागरिकों तक समय से पहुंच सके। उन्होंने विभागीय व्यय की समीक्षा करते हुए स्वीकृत बजट के समयबद्ध, पारदर्शी एवं परिणामोन्मुख उपयोग पर विशेष बल दिया। साथ ही उन्होंने आज़ादी से पूर्व स्थापित नलकूपों को धरोहर नलकूप के रूप में संरक्षित करने के निर्देश भी दिए।
बैठक में बाढ़, सिंचाई एवं यांत्रिक क्षेत्र की प्रमुख परियोजनाओं की विस्तार से समीक्षा की गई। विशेष रूप से वृंदावन-मथुरा स्थित नदी घाटों के विस्तार, नवीनीकरण एवं सौंदर्यीकरण परियोजना की भौतिक प्रगति की समीक्षा करते हुए मंत्री ने कार्य को उच्च गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए। इसके अतिरिक्त एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए आगामी वर्षों में पूर्ण होने वाली नौ प्रमुख परियोजनाओं, जिनमें मध्यगंगा नहर परियोजना (द्वितीय चरण), एरच बहुद्देशीय बांध परियोजना, बदायूं सिंचाई परियोजना, भौरट बांध परियोजना, किच्छा बैराज परियोजना, रामपुर बैराज परियोजना, रोहिन नदी परियोजना तथा महाराजगंज जनपद में रोहिन बैराज-3 शामिल हैं, की भी गहन समीक्षा की गई।
बैठक में सड़क गड्ढामुक्ति एवं नवीनीकरण, नहरों की सिल्ट सफाई तथा टेल फीड कार्यों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों ने अवगत कराया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में गड्ढामुक्ति के निर्धारित लक्ष्य 905.70 किमी के सापेक्ष शत-प्रतिशत सड़कों को गड्ढामुक्त किया जा चुका है। वहीं, नवीनीकरण के लक्ष्य 1495.08 किमी के सापेक्ष अब तक 1155.17 किमी सड़कों का नवीनीकरण पूर्ण किया गया है। मंत्री ने शेष कार्यों को शीघ्र पूर्ण कराने के निर्देश दिए।रबी 1433 फसली में नहरों की सिल्ट सफाई के लक्ष्य के सापेक्ष 106 प्रतिशत से अधिक प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए मंत्री ने इसी गति को बनाए रखने के निर्देश दिए। टेल फीड के अंतर्गत कुल लक्ष्य के सापेक्ष 93 प्रतिशत से अधिक टेल्स तक पानी पहुंचाए जाने की जानकारी दी गई, जबकि शेष टेल्स को प्राथमिकता के आधार पर आच्छादित करने के निर्देश दिए गए।जलशक्ति मंत्री ने नहरों की टेल पर नियमित चौपाल आयोजित कर किसानों से सीधा संवाद स्थापित करने, नदियों एवं नहरों में प्रदूषण नियंत्रण हेतु संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर प्रभावी कार्रवाई करने तथा संगठनवार नहरों के हेल्थ स्टेटस की नियमित समीक्षा कर समय से मरम्मत कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने सिंचाई विभाग की भूमि पर अतिक्रमण के मामलों में सख़्त कार्रवाई के निर्देश देते हुए कहा कि चिन्हांकन कर तत्काल अतिक्रमण हटाया जाए और भविष्य में पुनः अतिक्रमण न हो, इसके लिए प्रभावी निगरानी व्यवस्था लागू की जाए।बैठक के अंत में मंत्री श्री स्वतंत्र देव सिंह ने स्पष्ट कहा कि लापरवाही और लक्ष्य से विचलन किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। सभी अधिकारी पूर्ण जिम्मेदारी, प्रतिबद्धता और समयबद्धता के साथ कार्य करें, ताकि सिंचाई एवं जल संसाधन से जुड़ी योजनाओं का लाभ प्रदेश के प्रत्येक किसान और नागरिक तक प्रभावी रूप से पहुंच सके।समीक्षा बैठक में प्रमुख सचिव सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग श्री अनिल गर्ग, प्रमुख अभियंता एवं विभागाध्यक्ष श्री संदीप कुमार, प्रमुख अभियंता परिकल्प एवं नियोजन श्री अशोक कुमार सिंह सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
