लखनऊ। प्रदेश के पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री नरेन्द्र कश्यप ने विधान परिषद में पूछे गए प्रश्नों और जिज्ञासाओं का उत्तर देते हुए कहा कि योगी सरकार दिव्यांगजनों के सशक्तीकरण, पारदर्शिता और समयबद्ध लाभ सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि विभाग की सभी योजनाएं ऑनलाइन, पारदर्शी और दलाल-मुक्त प्रणाली के तहत संचालित की जा रही हैं।मंत्री कश्यप ने सदन को अवगत कराया कि दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग द्वारा संचालित विशेष विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में वर्ष 2011 में चयनित जेटीसी ग्रेड शिक्षकों में से एलटी ग्रेड शिक्षक के नौ रिक्त पदों पर पदोन्नति हेतु अध्याचन 16 जुलाई 2025 को तथा एलटी ग्रेड से प्रवक्ता के 28 पदों के सापेक्ष अध्याचन 12 दिसंबर 2022 को उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग को प्रेषित किया जा चुका है, जिन पर वर्तमान में कार्रवाई प्रक्रियाधीन है।उन्होंने स्पष्ट किया कि वितरण कार्यक्रमों में वरिष्ठ अथवा कनिष्ठ सभी जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाना अनिवार्य है।
यदि भविष्य में किसी अधिकारी द्वारा इस व्यवस्था की अनदेखी की जाती है तो उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि संबंधित वरिष्ठ सदस्य को न केवल वितरण कार्यक्रमों में आमंत्रित किया गया, बल्कि उत्तर प्रदेश सलाहकार बोर्ड की बैठकों में भी सम्मानपूर्वक सहभागिता सुनिश्चित की गई है।मंत्री नरेन्द्र कश्यप ने जानकारी दी कि भारत सरकार द्वारा संचालित स्वावलंबन पोर्टल के माध्यम से यूडीआईडी कार्ड जारी किए जाते हैं। आकांक्षी जनपद सिद्धार्थनगर में 31 जनवरी 2026 तक कुल 24,414 दिव्यांगजनों को यूडीआईडी कार्ड निर्गत किए जा चुके हैं। वहीं दिव्यांग भरण-पोषण अनुदान एवं दिव्यांग पेंशन योजना के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2025-26 में जनपद सिद्धार्थनगर में 14,356 पात्र लाभार्थियों को पेंशन का लाभ दिया गया है।
कुष्ठावस्था पेंशन योजना के तहत 153 लाभार्थियों को तथा कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण योजना के अंतर्गत 321 पात्र दिव्यांगजनों को लाभान्वित किया गया है। उन्होंने बताया कि 31 दिसंबर 2025 तक कोई भी पात्र लाभार्थी लंबित नहीं है।पेंशन पात्रता की शर्तों को स्पष्ट करते हुए मंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश का मूल निवासी ऐसा दिव्यांगजन जिसकी दिव्यांगता न्यूनतम 40 प्रतिशत हो, जिसकी वार्षिक आय ग्रामीण क्षेत्र में 46,080 रुपये तथा शहरी क्षेत्र में 56,460 रुपये से अधिक न हो और जो किसी अन्य पेंशन योजना का लाभ न ले रहा हो, वह दिव्यांग पेंशन का पात्र है। पात्र लाभार्थियों को 1,000 रुपये प्रतिमाह की दर से पेंशन दी जाती है। इसके लिए एकीकृत सामाजिक पेंशन पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन किया जाता है, जिसकी जांच जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी द्वारा की जाती है। पात्र पाए जाने पर बैंक सत्यापन के बाद पीएफएमएस पोर्टल के माध्यम से धनराशि सीधे लाभार्थी के खाते में भेजी जाती है।मंत्री कश्यप ने यह भी स्मरण कराया कि वर्ष 2017 से पूर्व दिव्यांग पेंशन मात्र 300 रुपये प्रतिमाह थी, जिसे योगी सरकार ने बढ़ाकर 1,000 रुपये प्रतिमाह किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूडीआईडी कार्ड धारक सभी दिव्यांगजन स्वतः पेंशन के पात्र नहीं होते, बल्कि निर्धारित आय और अन्य शर्तों को पूरा करने वाले आवेदकों को ही लाभ दिया जाता है।
उन्होंने आश्वस्त किया कि यदि किसी पात्र दिव्यांगजन को पेंशन नहीं मिल रही है या कहीं भ्रष्टाचार की शिकायत मिलती है, तो उसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि जो दिव्यांगजन स्वयं कार्यालय तक नहीं आ सकते, उनके घर जाकर आवेदन की प्रक्रिया पूरी कराई जाए।अंत में मंत्री नरेन्द्र कश्यप ने कहा कि योगी सरकार में दिव्यांगजनों से जुड़ी किसी भी योजना में धन की कमी नहीं है। जो भी पात्र व्यक्ति आवेदन करेगा, उसे शत-प्रतिशत लाभ सुनिश्चित किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश का कोई भी पात्र दिव्यांगजन योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे।
