कूरेभार/सुलतानपुर। कूरेभार क्षेत्र के सरैया मझौवा गांव में आयोजित संगीतमय सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन श्रद्धा, भक्ति और ज्ञान की त्रिवेणी प्रवाहित होती रही। वृंदावन धाम से पधारे कथा व्यास पूज्य श्री मुकेश आनंद जी महाराज के श्रीमुख से भागवत महात्म्य की अमृतवर्षा होते ही पूरा कथा पंडाल भक्तिरस में सराबोर हो उठा। भजन-कीर्तन और जयघोष के बीच बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाव-विभोर होकर कथा श्रवण करते नजर आए।
कथा व्यास ने अपने प्रवचन में कहा कि श्रीमद्भागवत केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीव के कल्याण का दिव्य मार्ग है। भागवत कथा के श्रवण से मन, बुद्धि और आत्मा का शुद्धिकरण होता है तथा जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है। उन्होंने राजा परीक्षित और शुकदेव जी के संवाद का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि कलियुग में भक्ति ही सबसे सरल और प्रभावी साधन है, जो मनुष्य को भवसागर से पार लगाती है। पूज्य महाराज ने आगे कहा कि भागवत कथा सुनने से मनुष्य के भीतर छिपे विकार समाप्त होते हैं और ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास जागृत होता है। उन्होंने गृहस्थ जीवन में भक्ति, सदाचार और सेवा भाव अपनाने का संदेश देते हुए कहा कि जिस घर में भागवत का पाठ होता है, वहां साक्षात श्रीहरि का वास होता है। कथा के दौरान प्रस्तुत संगीतमय भजनों पर श्रद्धालु झूमते नजर आए।
कथा में मुख्य यजमान सहित बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष और बच्चे उपस्थित रहे। आयोजकों द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं। कथा के समापन पर आरती के पश्चात प्रसाद वितरण किया गया। पूरे क्षेत्र में कथा को लेकर भक्तिमय वातावरण बना हुआ है और आगामी दिनों में श्रीकृष्ण लीलाओं के प्रसंगों के श्रवण को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा ह
