लखनऊ । स्थित बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में 10 जनवरी को विश्वविद्यालय दिवस के अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय समारोह का भव्य शुभारम्भ हुआ। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के आर्थिक सलाहकार एवं चाणक्य विश्वविद्यालय, बैंगलोर के प्रो. के.वी. राजू रहे। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में बीबीएयू के पूर्व कुलपति प्रो. बी. हनुमैया तथा मुख्य वक्ता के रूप में पूर्व सलाहकार, शिक्षा, योजना आयोग, भारत सरकार, हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रथम कुलपति और राजस्थान विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. फुरकान कमर उपस्थित रहे। मंच पर कार्यक्रम संयोजक प्रो. राम चंद्रा एवं प्रो. कुशेंद्र मिश्रा भी मौजूद रहे। कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्वलन एवं बाबासाहेब की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ हुआ। इसके पश्चात विश्वविद्यालय कुलगीत का गायन हुआ तथा आयोजन समिति की ओर से अतिथियों का पौधा भेंट कर स्वागत किया गया। प्रारम्भ में कार्यक्रम संयोजक प्रो. राम चंद्रा ने उपस्थित जनसमूह का स्वागत करते हुए कार्यक्रम के उद्देश्य और रूपरेखा की जानकारी दी। मंच संचालन डॉ. लता बाजपेयी सिंह द्वारा किया गया।अपने अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने कहा कि बीबीएयू की विकास यात्रा शैक्षणिक, सांस्कृतिक और सामाजिक निर्माण की एक सशक्त प्रक्रिया रही है, जिसमें विचारों ने केंद्रीय भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि विचार नवाचार को जन्म देते हैं, नवाचार से उद्यम विकसित होते हैं और उद्यम से राष्ट्र निर्माण संभव होता है। विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग का सशक्त होना आवश्यक है, क्योंकि देश की प्रगति केवल आर्थिक मजबूती से नहीं, बल्कि समग्र विकास और प्रत्येक नागरिक की सहभागिता से ही संभव है। उन्होंने संस्थागत विकास योजना को एक जीवंत दस्तावेज बताते हुए कहा कि यह विकसित भारत–2047 के दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करने वाली होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने रोजगारपरक शिक्षा, अप्रेंटिसशिप, उद्यमिता, कौशल आधारित सूक्ष्म पाठ्यक्रमों, तकनीक के प्रभावी उपयोग और मानसिक संतुलन की आवश्यकता पर बल दिया। अंत में उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा की ओर लौटने और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भावना के अनुरूप शिक्षा को आगे बढ़ाने की आवश्यकता रेखांकित की।मुख्य अतिथि प्रो. के.वी. राजू ने विश्वविद्यालय की 30 वर्षों की विकास यात्रा को उपलब्धियों से परिपूर्ण बताते हुए कहा कि अब आने वाले 22 वर्षों के लिए विकसित भारत–2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए स्पष्ट, दूरदर्शी और परिणाम आधारित लक्ष्य निर्धारित करने होंगे। उन्होंने संस्थागत विकास योजना की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यही योजना विश्वविद्यालय की दिशा और प्रभाव तय करती है। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग, छात्र-केंद्रित दृष्टिकोण, कौशल आधारित उच्च गुणवत्ता वाले पाठ्यक्रमों और वैश्विक मानकों पर विश्वविद्यालय के आकलन की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका कहना था कि बीबीएयू को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों की पहली पसंद बनाने के लिए उत्कृष्ट शैक्षणिक और तकनीकी वातावरण विकसित करना होगा। साथ ही पब्लिक–प्राइवेट पार्टनरशिप को बढ़ावा देकर संस्थागत विकास को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया जा सकता है।विशिष्ट अतिथि प्रो. बी. हनुमैया ने विश्वविद्यालय से जुड़ी अपनी स्मृतियों और अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि सीमित संसाधनों से प्रारम्भ हुआ यह संस्थान आज आधुनिक आधारभूत संरचना, विविध पाठ्यक्रमों, गुणवत्ता युक्त शोध और नवाचार के साथ निरंतर प्रगति कर रहा है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय विश्वविद्यालय परिवार के समर्पित प्रयासों को दिया।मुख्य वक्ता प्रो. फुरकान कमर ने कहा कि बीबीएयू की गुणवत्ता युक्त शिक्षा, सुदृढ़ ढांचा, उत्कृष्ट शोध और नैक ए++ सहित अन्य प्रतिष्ठित रैंकिंग्स विश्वविद्यालय की समृद्ध विकास यात्रा का प्रमाण हैं। उन्होंने उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात बढ़ाने, समावेशी और न्यायसंगत नीतियों, शिक्षा में निवेश, 3F—फंडिंग, फैकल्टी और फ्रीडम—की आवश्यकता तथा आलोचनात्मक चिंतन आधारित ज्ञान पर विशेष बल दिया।कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय मीडिया सेंटर द्वारा तैयार की गई एक प्रभावशाली डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन किया गया, जिसमें स्थापना से लेकर वर्तमान तक की विकास यात्रा को प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की विकास गाथा से संबंधित पुस्तिका और संस्थागत विकास योजना की बुकलेट का विमोचन भी किया गया। प्रो. कुशेंद्र मिश्रा द्वारा संस्थागत विकास योजना के प्रारूप की प्रस्तुति दी गई तथा आयोजन समिति की ओर से अतिथियों को अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर आभार व्यक्त किया गया। अंत में प्रो. शूरा दारापुरी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में विभिन्न संकायों के संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, शिक्षक, अधिकारी, शोधार्थी, कर्मचारी और विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।उल्लेखनीय है कि विश्वविद्यालय द्वारा 10 से 12 जनवरी तक विश्वविद्यालय दिवस के अवसर पर तीन दिवसीय समारोह का आयोजन किया जा रहा है। इसके अंतर्गत 11 जनवरी को ‘विकसित भारत के संकल्प की सिद्धि हेतु सामाजिक परिवर्तन का आह्वान’ विषय पर संगोष्ठी आयोजित की जाएगी, जिसकी अध्यक्षता कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल करेंगे। संगोष्ठी में उच्च शिक्षा, सामाजिक न्याय, संस्कृति, पर्यावरण और राष्ट्रीय चेतना से जुड़े विविध विषयों पर गहन और सार्थक विचार-विमर्श किया जाएगा।
