लम्भुआ/सुलतानपुर(आरएनएस )। विधानसभा आज सिर्फ एक क्षेत्र नहीं, बल्कि विकास का मॉडल बनकर उभर रही है। बीते तीन वर्षों में यहाँ जिस तेजी से सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य, खेल और जनकल्याण के काम हुए हैं, उसने यह साफ कर दिया है कि जब नेतृत्व मजबूत हो, नीयत साफ हो और जनता के प्रति जवाबदेही हो, तो विकास अपने आप जमीन पर उतरता है।ग्रामीण स्टेडियम, ओपन जिम, हाईमास्ट लाइट, सोलर लाइट, नए थाने की स्थापना, तहसील में बार सभागार, मंदिरों का सौंदर्यीकरणकृये सब सिर्फ योजनाएँ नहीं, बल्कि उस सोच का परिणाम हैं जो लम्भुआ को पीछे नहीं, आगे ले जाना चाहती है।जल जीवन मिशन के तहत 63 हजार से अधिक घरों में नल से जल पहुँचना, 17 हजार से अधिक नए बिजली कनेक्शन, सैकड़ों किलोमीटर लाइन का नवीनीकरण और उपकेंद्रों की क्षमता वृद्धिकृयह सब दर्शाता है कि यहाँ विकास सिर्फ कागजों में नहीं, घर-घर तक पहुँचा है। किसानों को सम्मान निधि, गरीबों को आवास, महिलाओं को पेंशन, वृद्धों को सहारा, दिव्यांगों को सम्मानकृहर वर्ग के लिए कुछ न कुछ है। यही वजह है कि लम्भुआ आज भरोसे का दूसरा नाम बनता जा रहा है। जनप्रतिनिधि की सक्रियता और उपलब्धता की चर्चा सिर्फ क्षेत्र में ही नहीं, आसपास की विधानसभाओं में भी है। लोग अपनी समस्याएँ लेकर लम्भुआ पहुँचते हैं, क्योंकि उन्हें भरोसा है कि यहाँ सुना भी जाएगा और समाधान भी होगा। लम्भुआ आज उस राजनीति की मिसाल है जहाँ भाषण कम और काम ज्यादा है। जहाँ फोटो से ज्यादा फोकस फाइल और फील्ड पर है। और यही कारण है कि जनता के बीच संदेश साफ हैकृलम्भुआ में नेतृत्व काम करता है, सिर्फ वादा नहीं।
स्टेशन का मुख्य प्रवेश द्वार बंद, यात्रियों को असुविधा
सुल्तानपुर(आरएनएस )। रेलवे स्टेशन पर अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत चल रहे निर्माण कार्य के चलते यात्रियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कार्यदायी संस्था द्वारा स्टेशन का मुख्य प्रवेश द्वार अचानक बंद कर दिया गया है और टिनशेड व बल्लियों लगाकर रास्ता पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया गया है। इसके कारण यात्रियों को अब एनआरएमयू संघ भवन के पास से रेलवे कॉलोनी के पीछे होकर बनाए गए एक वैकल्पिक मार्ग से स्टेशन तक जाना पड़ रहा है।
यह नया मार्ग लगभग 300 मीटर लंबा है और बेहद क्षतिग्रस्त हालत में है। जगह-जगह गड्ढे और टूटी सड़क के कारण पैदल चलना भी कठिन हो गया है। बाइक और अन्य छोटे वाहनों से गुजरना तो और भी जोखिम भरा साबित हो रहा है। वहीं जीआरपी और आरपीएफ थाने के सामने भी जेसीबी से खुदाई कर दी गई है, जिससे आवागमन और अधिक बाधित हो गया है। उत्तरीय रेलवे मजदूर यूनियन के शाखा अध्यक्ष आसिम सज्जाद ने इस फैसले पर कड़ा एतराज जताया है। उन्होंने कहा कि पिछले डेढ़ साल से स्टेशन पर निर्माण कार्य चल रहा है, लेकिन बिना किसी पूर्व सूचना के मुख्य द्वार बंद कर देना यात्रियों के साथ-साथ कर्मचारियों के लिए भी परेशानी का कारण बन गया है। आसिम सज्जाद ने बताया कि वैकल्पिक मार्ग रेलवे कॉलोनी के पीछे कच्चे और खड़ंजे रास्ते से होकर गुजरता है, जिसकी हालत बेहद खराब है। इसी मार्ग पर एनआरएमयू, नॉर्दर्न रेलवे यूनियन और ओबीसी एसोसिएशन के कार्यालय भी स्थित हैं, जहां कर्मचारी अपनी समस्याओं के समाधान के लिए आते-जाते रहते हैं। रास्ता खराब होने से अब उन्हें भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि आरक्षण केंद्र के पास नए कार्यालय बनाने का आदेश पहले ही हो चुका है और निर्माण कार्य जारी है, लेकिन जब तक वह पूरा नहीं होता, तब तक पुराने मार्ग को बंद करना बिल्कुल उचित नहीं है। सज्जाद ने प्रशासन से अपील की कि 15 फरवरी तक चल रहे माघ मेले के दौरान यात्रियों की संख्या में भारी बढ़ोतरी होगी, ऐसे में टिकट लेने और स्टेशन तक पहुंचने में लोगों को और ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ेगी। उन्होंने मांग की कि यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था सुधारी जाए या मुख्य प्रवेश द्वार को अस्थायी रूप से खोला जाए।
शिक्षिकाओं, रसोइयों और बच्चों से अभद्रता के आरोप में सहायक अध्यापक निलंबित
सुलतानपुर। जिले के भदैयां विकासखंड अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय भरसारे में तैनात सहायक अध्यापक राघवेंद्र द्विवेदी को महिला शिक्षिकाओं, रसोइयों और बच्चों के साथ अभद्रता के गंभीर आरोपों के बाद निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) उपेंद्र गुप्ता द्वारा अभिभावकों, विद्यालय प्रशासन और भाजपा मंडल अध्यक्ष की शिकायतों के आधार पर की गई है।खंड शिक्षा अधिकारी भदैयां के अनुसार, प्राथमिक विद्यालय भरसारे के लगभग 45 अभिभावकों, विद्यालय के प्रधानाध्यापक तथा भाजपा मंडल अध्यक्ष राम मूर्ति वर्मा सहित अन्य लोगों द्वारा आईजीआरएस पोर्टल के माध्यम से लगातार शिकायतें दर्ज कराई गई थीं। इन शिकायतों में सहायक अध्यापक राघवेंद्र द्विवेदी पर अभद्र भाषा का प्रयोग, महिला शिक्षिकाओं से गाली-गलौज और बच्चों के सामने उन्हें अपमानित करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे।स्थलीय जांच में सामने आए चौंकाने वाले तथ्यशिकायतों की गंभीरता को देखते हुए 11 दिसंबर 2025 को विद्यालय का स्थलीय निरीक्षण किया गया। जांच के दौरान विद्यालय की रसोइयां मनभावती, रेखा, सरोजा, सरिता सहित लगभग 11 अभिभावकों से अलग-अलग पूछताछ की गई। सभी ने एक स्वर में राघवेंद्र द्विवेदी पर शिक्षिकाओं से अभद्रता करने, रसोइयों का शॉल छूने तथा जातिवाचक शब्दों का प्रयोग करने की पुष्टि की।अभिभावकों ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि राघवेंद्र द्विवेदी विद्यालय में बने रहे तो वे अपने बच्चों को स्कूल से निकालने के लिए मजबूर होंगे। जांच में यह भी सामने आया कि उनके कार्यभार ग्रहण करने के बाद से विद्यालय में गुटबाजी और तनाव का माहौल लगातार बढ़ता गया।जांच आख्या में कठोर कार्रवाई की सिफारिशजांच आख्या में राघवेंद्र द्विवेदी को पदीय दायित्वों का निर्वहन न करने, शिक्षा का अधिकार अधिनियम का पालन न करने, विद्यालय की शिक्षा व्यवस्था प्रभावित करने तथा कर्मचारी नियमावली के प्रतिकूल आचरण का दोषी पाया गया। इसके आधार पर उनके विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति की गई।17 दिसंबर 2025 को उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, जिसका जवाब उन्होंने 30 दिसंबर 2025 को दिया। हालांकि, उनका स्पष्टीकरण असंतोषजनक पाया गया। इसके बाद प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
