अयोध्या। कृषि विज्ञान केन्द्र पर फसल अनुसंधान केन्द्र पर उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (उपकार), लखनऊ द्वारा वित्त पोषित “समसामयिक कृषि तकनीक एवं प्राकृतिक खेती आधारित उत्पादकता’ विषय पर दो दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ किया गया। इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम में जनपद के विभिन्न विकासखण्डों से आए लगभग 80 से अधिक प्रगतिशील कृषकों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि उपमहानिदेशक (उपकार), विशिष्ट अतिथि कृषि उपनिदेशक एवं शोध निदेशक की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ। अपने उद्घाटन भाषण में मुख्य अतिथि उपमहानिदेशक (उपकार) डा. परिमेन्द्र सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में कृषि क्षेत्र अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है, जिनमें जलवायु परिवर्तन, मृदा उर्वरता में गिरावट, उत्पादन लागत में वृद्धि तथा बाजार की अनिश्चितताएं प्रमुख हैं। इन परिस्थितियों में आवश्यक है कि किसान आधुनिक एवं वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाते हुए प्राकृतिक खेती की ओर अग्रसर हों। डा० संजय कुमार ने कहा कि प्राकृतिक खेती न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि इससे उत्पादन लागत में कमी एवं उत्पाद की गुणवत्ता में वृद्धि संभव है।
उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाएं तथा जैविक एवं देशी संसाधनों का अधिकतम उपयोग करें। डा० पंकज सिंह इस बात पर भी जोर दिया कि कृषि में तकनीकी नवाचार, यंत्रीकरण एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग समय की मांग है। विशिष्ट अतिथि कृषि उपनिदेशक डा. पी.के.कनौजिया ने अपने संबोधन में विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं एवं अनुदानों की जानकारी किसानों को दी। उन्होंने बताया कि सरकार प्राकृतिक खेती, सूक्ष्म सिंचाई, फसल विविधीकरण एवं किसान उत्पादक संगठन को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रयास कर रही है। के.वी.के. मसौधा के अध्यक्ष डा.वी.पी. शाही ने किसानों को सलाह दी कि वे रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध प्रयोग से बचें तथा जैविक विकल्पों को अपनाएं, जिससे भूमि की दीर्घकालिक उत्पादकता बनी रहे। शोध निदेशक प्रो० शम्भू प्रसाद ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण से प्राकृतिक खेती के सिद्धांतों की विस्तार से व्याख्या की। उन्होंने जीवामृत, बीजामृत, घनजीवामृत, आच्छादन (मल्चिंग) एवं वाफसा जैसे प्रमुख तत्वों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि ये तकनीकें मृदा में सूक्ष्मजीवों की सक्रियता बढ़ाती हैं और फसल की वृद्धि में सहायक होती हैं। प्रो.वी. प्रसाद द्वारा समन्वित पोषक तत्व प्रबंधन, समन्वित कीट एवं रोग प्रबंधन तथा उन्नत एवं क्षेत्र-विशिष्ट किस्मों के चयन की महत्ता पर बल दिया।
प्रशिक्षण में किसानों को समसामयिक कृषि तकनीकों जैसे उन्नत बीज उत्पादन, जल संरक्षण तकनीक, ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई, फसल चक्र, अंतःफसली प्रणाली तथा कृषि यंत्रीकरण के बारे में प्रो. सौरभ दीक्षित ने विस्तृत जानकारी दी। डॉ. हिमांशु तिवारी उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (उपकार), लखनऊ द्वारा प्राकृतिक खेतीः विकसित भारत / 2047 की मजबूत नींव एवं प्रेमचंद चौरसिया उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (उपकार), लखनऊ ने प्राकृतिक खेती अपनाएँ, भविष्य सुरक्षित बनाए द्वारा पॉवर पॉइंट प्रस्तुतीकरण एवं वीडियो के माध्यम से भी जानकारी साझा की गई। डा. विद्यासागर ने किसानों को समसामयिक पशुपालन के द्वारा किसानो को अपनी आय कैसे दुगनी करे इस विषय पर विस्तृत जानकारी दी। श्री अमन सिंह ने किसानो को नयी प्रजाति के विषय पर विस्तृत जानकारी दी। कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम में डा. अनूप कुमार एवं कृषि विज्ञान केन्द्र एवं फसल अनुसधान केन्द्र के समस्त वैज्ञानिक / कर्मचारी उपस्थित रहें। द्वितीय दिवस पर प्राकृतिक खेती के व्यावहारिक पक्ष पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। किसानों को जीवामृत एवं बीजामृत बनाने की विधि का प्रत्यक्ष प्रदर्शन कराया जाएगा। साथ ही, मृदा परीक्षण प्रयोगशाला का भ्रमण कर मृदा परीक्षण की प्रक्रिया एवं उसकी उपयोगिता समझाई जाएगी। किसानों को यह भी बताया जाएगा कि किस प्रकार कम लागत में स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। कार्यक्रम के दौरान किसानों ने अपने अनुभव साझा किए तथा विशेषज्ञों से विभिन्न समस्याओं के समाधान प्राप्त किए। कई किसानों ने बताया कि प्राकृतिक खेती अपनाने से उनकी लागत में कमी आई है तथा उत्पाद की मांग बाजार में बढ़ी है।
विशेषज्ञों ने किसानों को समूह आधारित खेती एवं किसान उत्पादक संगठनों से जुड़ने की सलाह दी, जिससे विपणन एवं मूल्य संवर्धन में सहायता मिल सके। केन्द्राध्यक्ष ने अपने समापन वक्तव्य में कहा कि कृषि विज्ञान केन्द्र का उद्देश्य प्रयोगशाला की तकनीकों को खेत तक पहुंचाना है। उन्होंने आश्वासन दिया कि भविष्य में भी इस प्रकार के प्रशिक्षण, संगोष्ठी एवं कृषक गोष्ठियों का आयोजन नियमित रूप से किया जाएगा, ताकि किसान नवीनतम तकनीकों से अवगत रहें और अपनी आय में निरंतर वृद्धि कर सकें। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ वैज्ञानिक द्वारा किया गया तथा अंत में धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर कृषि विभाग के अधिकारी, वैज्ञानिकगण, प्रगतिशील कृषक एवं क्षेत्रीय प्रतिनिधि उपस्थित रहे। यह दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों को आत्मनिर्भर, पर्यावरण के प्रति जागरूक एवं तकनीकी रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे निश्चित ही जनपद में प्राकृतिक खेती एवं आधुनिक कृषि तकनीकों के समन्वित उपयोग को बढ़ावा मिलेगा तथा कृषकों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य की प्राप्ति में सहायता मिलेगी।
